"हर खबर, आपकी नज़र"

kpn 24

ऑन ड्यूटी भेजकर काटा वेतन, अब कहा जा रहा कोर्ट जाओ

मनीष विद्यार्थी, खरगोन।
KPN24:- मध्यप्रदेश के खरगोन जिले की दो शिक्षिकाएं पिछले तीन साल से अपने वेतन कटौती की समस्या को लेकर विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं। लेकिन समाधान की जगह उन्हें अब सीधे “कोर्ट जाने” की सलाह दी जा रही है। यह जवाब आदिवासी विकास विभाग के प्रभारी सहायक परियोजना प्रशासक राजेंद्र राखोलिया ने जनसुनवाई में शिक्षिकाओं को दिया।

मामला – मोनिका गंगराड़े

झिरन्या विकासखंड के शिवना हाई स्कूल की शिक्षिका मोनिका गंगराड़े का आरोप है कि सितम्बर 2022 में उनका चार दिन का वेतन ₹6,986 काट लिया गया।
उनका कहना है कि उस दौरान उन्होंने अगस्त माह में 2 दिन आकस्मिक अवकाश और 1 दिन हरतालिका तीज का अवकाश लिया था। वहीं, सितम्बर में उन्हें विकासखंड शिक्षा अधिकारी के आदेश पर नवनियुक्त शिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु भोपाल ऑन ड्यूटी भेजा गया था। इसके बावजूद वेतन काट लिया गया।
उन्होंने कलेक्टर, बीईओ और सहायक आयुक्त आदिवासी विकास तक शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

दूसरा मामला – गोपी पंचोली

मिटावल संकुल के प्राथमिक विद्यालय नीमखेडी की शिक्षिका गोपी पंचोली को सहायक आयुक्त के आदेश पर वर्ष 2022 से 2024 तक खंडवा बीएड कॉलेज में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था।
उनका कहना है कि नियमित उपस्थिति देने के बावजूद सात दिन का वेतन ₹11,700 काट लिया गया। बार-बार शिकायत के बाद भी आज तक राशि वापस नहीं हुई।

अफसरों का जवाब – “मुझे जानकारी नहीं”

जब दोनों शिक्षिकाओं ने जनसुनवाई में समस्या रखी तो प्रभारी अधिकारी राखोलिया ने कह दिया— “आपका समाधान यहां नहीं होगा, वेतन वापस नहीं मिलेगा, जाना है तो कोर्ट जाइए।”
वहीं, बीईओ महाजन का कहना है कि यह मामला उनके कार्यकाल का नहीं है, इसलिए उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

शिक्षिकाओं की परेशानी

लगातार विभागीय चक्कर काटने और वर्षों से वेतन कटने की वजह से शिक्षिकाएं आर्थिक व मानसिक परेशानी झेल रही हैं। उनका कहना है कि यदि ऑन ड्यूटी आदेश के बावजूद वेतन काटा जा सकता है तो यह अधिकारियों की मनमानी है।

यह मामला न केवल विभागीय लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि आखिर शिक्षक, जो भविष्य की नींव गढ़ते हैं, वेतन के हक के लिए कोर्ट तक क्यों भटकें?

Kpn 24
Author: Kpn 24

Leave a Comment

Read More