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शराब के शौकीनों से ठेकेदार की मनमानी — अब दारू भी हुई “लक्ज़री आइटम”!

मनीष विद्यार्थी, खरगोन।
KPN24:- “महंगी बहुत ही शराब के, थोड़ी-थोड़ी पिया करो…” — पंकज उधास की ये ग़ज़ल इन दिनों जिलेभर के शराब प्रेमियों के दिल पर नहीं, बल्कि जेब पर भी खूब भारी पड़ रही है। वजह साफ़ है — ठेकेदारों की मनमानी और आबकारी विभाग की मौन साधना!

जिलेभर की शराब दुकानों पर दाम ऐसे बढ़े हैं जैसे चुनावी वादों में उम्मीदें — बहुत ऊँची और पूरी न होने वाली।

एमआरपी अब बस बोतल पर छपा एक मज़ाक!

ग्राहकों की शिकायत है कि ठेकेदार एमआरपी से ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं। और जब कोई बहस करे तो जवाब मिलता है —

 “लेना है तो लो, नहीं तो जाओ!”

अब बेचारे ग्राहक जाएँ भी तो कहाँ? आखिर मन का नशा कोई कम चीज़ नहीं! मजबूरी में महंगी बोतल खरीदनी ही पड़ती है, और फिर ग़ज़ल की लाइन याद आ जाती है — “थोड़ी-थोड़ी पिया करो…”

बारकोड की जगह ‘बार का कोड’ चलता है!

आबकारी विभाग ने चार महीने पहले बड़ा ऐलान किया था

“अब हर दुकान पर बारकोड होगा, जिससे कीमत पारदर्शी रहेगी।”

लेकिन हुआ उल्टा। दुकानों पर बारकोड तो गायब हैं, पर बार में कोड खूब चल रहे हैं — “भैया, इसको थोड़ा साइड में दे देना, ये हमारा रेगुलर कस्टमर है।”

ग्राहकों की मांग है कि बारकोड सिस्टम फिर से लागू किया जाए, ताकि “एमआरपी” का मतलब “माल रेट पब्लिकली” सच में बन सके।

ना स्टॉक बोर्ड, ना अधिकारी का नाम – सबकुछ रहस्यमयी!

नियम कहता है कि हर दुकान के बाहर स्टॉक बोर्ड, स्टाफ का नाम और शिकायत अधिकारी का नंबर होना चाहिए।
पर हकीकत में दुकानें ऐसे चल रही हैं जैसे कोई गुप्त मिशन — सब कुछ “कंफिडेंशियल”।

आबकारी विभाग के नियमों की किताब शायद दुकानदारों ने “काउंटर टेबल” की नीचे रख दी है — काम की चीज़ों की तरह इस्तेमाल नहीं, सजावट के लिए।

शिकायत करोगे तो आएगा “कॉल बैक” — लेकिन हल नहीं!

कई ग्राहकों ने बताया कि जब उन्होंने सीएम हेल्पलाइन या विभाग में शिकायत की, तो ठेकेदार या अधिकारी खुद फोन कर कहते हैं —

> “भैया, शिकायत वापस ले लो, हम देख लेंगे।”

अब “देख लेंगे” का मतलब आमतौर पर यही निकलता है — “कुछ नहीं होगा।”

अब शराबियों की गुहार – दाम घटाओ, गाना नहीं!

जिले के शराब प्रेमियों ने आबकारी विभाग से मांग की है कि दुकानों की जांच कराई जाए, कीमतों को नियंत्रण में लाया जाए और बारकोड सिस्टम को दोबारा लागू किया जाए।
वरना आने वाले दिनों में लोग ग़ज़ल नहीं, शिकायतें गुनगुनाते दिखेंगे —

“महंगी बहुत ही शराब के… थोड़ी-थोड़ी जिया करो!”

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Author: Kpn 24

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