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जनपद पंचायत अध्यक्ष की बहन गिरफ्तार — फर्जी मार्कशीट से आंगनवाड़ी नौकरी पाने का आरोप – हाईकोर्ट की फटकार के बाद आखिरकार हरकत में आई पुलिस

रिपोर्ट: मनीष विद्यार्थी, खरगोन

KPN24:- खरगोन जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग में नियुक्ति के नाम पर हुए बड़े फर्जीवाड़े का मामला आखिरकार पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है।
जनपद पंचायत गोगावा की अध्यक्ष गंगा बाई मंडलोई की बहन मनीषा मंडलोई को बुधवार सुबह चैनपुर से गिरफ्तार किया गया। करीब 11 महीने से फरार चल रही आरोपी को आखिरकार उच्च न्यायालय इंदौर के हस्तक्षेप के बाद पुलिस को पकड़ना पड़ा।

फर्जी मार्कशीट से पाई थी नियुक्ति

आरोप है कि मनीषा मंडलोई ने अपनी अंकसूची में 100 अंकों की फर्जी वृद्धि कर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पद के लिए पात्रता हासिल की और महिला एवं बाल विकास विभाग में नियुक्ति प्राप्त कर ली।
वर्ष 2023 में विभाग द्वारा की गई शिकायत पर थाना गोगावा में 16 अगस्त 2023 को एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करने में लगभग एक वर्ष की देरी की।

हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, तब चली पुलिस की कलम

लंबे समय तक राजनीतिक दबाव में दबे इस मामले में जब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया, तब जाकर पुलिस ने 4 नवंबर 2024 को आरोपी के विरुद्ध धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज किया।
फिर भी गिरफ्तारी नहीं हुई तो 19 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट ने एक बार फिर पुलिस को पारदर्शी जांच और त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए। इसके बाद बुधवार सुबह आरोपी को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस की भूमिका संदिग्ध — राजनीतिक दबाव का असर?

पूरा मामला अब पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर रहा है। जब विभाग ने शिकायत समय रहते कर दी थी, तो फिर कार्रवाई एक साल बाद क्यों हुई?
क्या पुलिस पर राजनीतिक दबाव था?
या फिर यह देरी प्रशासनिक मिलीभगत का परिणाम थी?

मीडिया से छिपाई गई गिरफ्तारी — क्या कुछ और छिपाना चाहती है पुलिस ?

सूत्रों के अनुसार, आरोपी की गिरफ्तारी को मीडिया से छिपाने की कोशिश की गई।
अब सवाल उठ रहा है कि जब गिरफ्तारी हुई, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
क्या पुलिस ने जानबूझकर गिरफ्तारी की सूचना दबाई, ताकि मामला ज्यादा न उछले?

यह सिर्फ एक फर्जी मार्कशीट का मामला नहीं है —

यह उस तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल है, जो शिकायत दर्ज होने के बावजूद एक साल तक मौन रहा।
अब देखना यह होगा कि जांच में किन-किन नामों का खुलासा होता है, और क्या राजनीतिक संरक्षण के साए में हुआ यह फर्जीवाड़ा अंततः न्याय तक पहुंच पाता है या नहीं।

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Author: Kpn 24

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