
KPN24:- कभी-कभी ज़िंदगी एक ही पल में बदल जाती है। बस एक वाक्य, एक पहचान—और फिर उम्मीदों व आशंकाओं के बीच झूलता पूरा परिवार।“आपके बच्चे की धड़कन कुछ अलग है…”गांव की मितानिन के ये साधारण से शब्द आज भी श्रीमती रजनी यादव की आत्मा को झकझोर देते हैं। आंखों में आंसू लिए वे कहती हैं,“अगर तब समझ जाते, तो शायद इतना डर नहीं सहना पड़ता… लेकिन भगवान ने समय रहते रास्ता दिखा दिया।”
मासूम खेल, अनजानी बीमारी
रायपुर जिले के गोगांव का रहने वाला अरमान, अपने भाइयों और दोस्तों के बीच बिल्कुल आम बच्चा था। पिट्टूल खेलना, गलियों में दौड़ना, बेफिक्र हँसी—उसके जीवन में कुछ भी असामान्य नहीं दिखता था।
बार-बार होने वाला सर्दी-बुखार माता-पिता को परेशान करता था, लेकिन किसी को यह अहसास नहीं था कि उसके छोटे से सीने में एक ऐसी खामोश बीमारी पल रही है, जो कभी भी उसकी सांसें छीन सकती थी।
वह दिन, जिसने किस्मत का रुख मोड़ दिया
13 दिसंबर 2025 को सरोरा स्थित शासकीय स्कूल में जब चिरायु टीम जांच के लिए पहुँची, तो यह एक सामान्य दिन लग रहा था।
लेकिन जैसे ही डॉक्टरों ने अरमान की जांच की, वे गंभीर हो गए। दिल की धड़कन सामान्य नहीं थी। उसी क्षण तय हो गया—अब देर नहीं की जा सकती।
गरीबी के बीच उम्मीद की किरण
अरमान को तुरंत श्री सत्य साईं नारायण अस्पताल, नया रायपुर ले जाया गया। जांच रिपोर्ट ने माता-पिता के पैरों तले ज़मीन खिसका दी—दिल में 18 मिमी का छेद।
ईंट-भट्ठे में मजदूरी करने वाले पिता रंगनाथ यादव और मां रजनी यादव के सामने सिर्फ एक सवाल था—बच्चा बचेगा या नहीं?
पैसे नहीं थे, साधन नहीं थे… लेकिन भरोसा था।
प्रोजेक्ट ‘धड़कन’ बना जीवन रक्षक
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर संचालित प्रोजेक्ट ‘धड़कन’ ने यहां मानवता का असली चेहरा दिखाया।
जिला प्रशासन, चिरायु टीम और श्री सत्य साईं नारायण अस्पताल के समन्वय से 28 दिसंबर 2025 को अरमान का जटिल हृदय ऑपरेशन पूरी तरह निःशुल्क सफलतापूर्वक किया गया।
उस दिन सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं हुआ—एक परिवार को दोबारा सांस मिली।
जब अस्पताल के बेड से उठकर बच्चा फिर मुस्कराया
कुछ ही दिनों बाद अरमान जब अस्पताल से छुट्टी लेकर घर लौटा, तो उसकी मुस्कान पूरे मोहल्ले में फैल गई।
आज वह फिर से खेलता है, दौड़ता है, हँसता है—और हर धड़कन के साथ यह याद दिलाता है कि समय पर मदद ज़िंदगी बचा सकती है।
मां की दुआ, पिता का भरोसा
भावुक होकर मां रजनी यादव कहती हैं,
“अगर यह योजना नहीं होती, तो शायद मेरा बच्चा आज मेरे पास नहीं होता।”
पिता रंगनाथ यादव की आवाज़ भर आती है—
“सरकार ने मेरे बेटे को जिंदगी दी है… इससे बड़ा एहसान कोई नहीं।”
सिर्फ खबर नहीं, इंसानियत की मिसाल
अरमान की कहानी सिर्फ एक सरकारी योजना की सफलता नहीं है,
यह कहानी है संवेदनशील शासन, समय पर पहचान और इंसानियत की—
जहाँ एक मासूम दिल को फिर से धड़कने का मौका मिला।
कभी-कभी एक धड़कन, सिर्फ दिल नहीं… पूरी ज़िंदगी बचा लेती है।










