
KPN24 :- विधानसभा क्षेत्र-33 अकलतरा में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद प्रारूप-07 के कथित दुरुपयोग को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी, बलौदा के अध्यक्ष सदन लाल यादव ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ को ज्ञापन सौंपकर मतदाता सूची से “वर्ग विशेष” के नाम सुनियोजित तरीके से विलोपित किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि बड़े पैमाने पर प्रारूप-07 जमा कर मतदाताओं के नाम कटवाने की कार्रवाई की जा रही है, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर कुठाराघात हो रहा है।
क्या है पूरा मामला?
निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची की शुद्धता के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया चलाई जा रही है। इसी प्रक्रिया के तहत प्रारूप-07 के माध्यम से आपत्तियां दर्ज कर नाम विलोपित किए जाते हैं।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि अकलतरा विधानसभा क्षेत्र में इस प्रक्रिया का “सुनियोजित दुरुपयोग” किया जा रहा है।
आरोपों के प्रमुख बिंदु
राजनीतिक दबाव का आरोप:
ज्ञापन में कहा गया है कि भाजपा के जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में प्रारूप-07 जमा कर रहे हैं और बीएलओ (BLO) पर नाम काटने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
बिना सत्यापन नाम विलोपित:
दिनांक 14/02/2026 तक प्राप्त जानकारी के अनुसार भाग संख्या 195, 196 एवं बलौदा नगर के अन्य भागों में एक-एक आपत्तिकर्ता की शिकायत के आधार पर दर्जनों मतदाताओं के नाम बिना विधिवत जांच के काटे जाने का आरोप लगाया गया है।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल:
एसआईआर प्रक्रिया में शामिल कुछ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताते हुए सही जानकारी उपलब्ध न कराने और केवल मौखिक आश्वासन देने का भी आरोप लगाया गया है।
कानूनी कार्रवाई की मांग:
ज्ञापन में मांग की गई है कि प्रारूप-07 स्वीकार करने से पहले आवेदनकर्ता की पहचान, कारण, साक्ष्य और मंशा की अनिवार्य जांच की जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
“जन आंदोलन और न्यायालय की शरण” की चेतावनी
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी, बलौदा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अंतिम मतदाता सूची में नियमविरुद्ध नाम कटने की पुष्टि होती है तो जन आंदोलन किया जाएगा और न्यायालय की शरण ली जाएगी।
ज्ञापन की प्रतिलिपि जिला निर्वाचन अधिकारी, जांजगीर-चांपा एवं सहायक निर्वाचन अधिकारी, विधानसभा क्षेत्र-33 अकलतरा को भी प्रेषित की गई है।
लोकतंत्र पर बड़ा सवाल
मतदाता सूची से नाम विलोपित होना किसी भी नागरिक के मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार से जुड़ा विषय है। ऐसे में यदि राजनीतिक दबाव या प्रक्रियागत अनियमितता सामने आती है तो यह केवल स्थानीय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत माना जाएगा।










