
मनीष विद्यार्थी बुरहानपुर।
KPN24:- इंदौर की सोनम रघुवंशी द्वारा अपने ही पति राजा रघुवंशी की हत्या करवाकर लापता रहने के बाद मिलने की कहानी देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। लगातार इस तरह प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्याओं का सिलसिला देश भर में जारी है और हमारा जिला भी इससे अछूता नहीं रहा।
बीते दिनों शाहपुर थाना क्षेत्र में भी एक ऐसा ही मामला हुआ था जिसमें एक महिला ने अपने प्रेमी और उसके दोस्तों के साथ मिलकर पति को मौत के घाट उतारकर प्रेमी के साथ फरार हो गई थी।
बता दें कि इन सभी घटनाओं के बीच मंगलवार को शहरभर में महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु के लिए वटसावित्री पूर्णिमा का व्रत रखा। दिनभर भूखी-प्यासी रहकर दोपहर को वटवृक्ष का पूजन कर महिलाओं ने एक-दूसरे को सुहाग की वस्तुएंं और फल भेंट कर आर्शीवाद लिए। शहर की इन महिलाओं ने पूजन के बाद इंदौर की सोनम जैसी महिलाओं को जमकर कोसा और उन्हें सुहागिनों पर कलंक बताया। उन्होंने बताया कि पति को हिंदू संस्कारों में परमेश्वर का दर्जा दिया गया है और उसी पति से धोखा कर उनकी हत्या करना महापाप है। ऐसी महिलाओं ने पतिव्रता नारियों की छवि को धूमिल किया है।
क्यों मनाया जाता है वट सावित्री का व्रत
इस व्रत की कथा और जानकारी के अनुसार जब सावित्री के पति के यमराज प्राण हर कर ले गए तो अपने पति को फिर से जीवित करने के लिए और उनके प्राण वापस लाने के लिए सावित्री स्वयं यमराज के पीछे गई और पति के प्राण वापस लाई। इसके बाद वटवृक्ष के नीचे साधना कर पूजा-अर्चना की थी। तभी से वटसावित्री की पूजा करने की परंपरा चल रही है। इस दिन महिलाएं सामुहिक रुप से वटसावित्री पूर्णिमा की कथा सुनती है और इसके बाद नजदिकी वटवृक्ष की पूजा कर एक दूसरे को सुहाग की वस्तुएं और फल भेंट करती है।
सोशल मीडिया की बलि चढ़ रहे संस्कार
व्रत का पूजन करने के बाद विवाहिता ने कहा कि सोनम जैसी महिलाओं को हिंदू समाज कभी माफ नहीं करेगा। दरअसल, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण सोशल मीडिया है। इंस्टाग्राम, फेसबुक और वाट्सअप पर दूर-दराज के अनजान लोगों से परिचय, बातचीत और फोटो वीडियों आदान-प्रदान का सिलसिला आसानी से शुरु हो जाता है। इसके बाद घर में अकेलेपन का फायदा उठाकर महिलाओं को गुंडे और असामाजिक टाईप के लोगों द्वारा बहकाया जाता है और उनका इतना ब्रेनवॉश कर दिया जाता है कि वे अपने भगवान माने जाने वाले पति की ही हत्यारन बन जाती है। सोशल मीडिया पर रोक लगाई जानी चाहिए।
अर्चना पवार, विवाहिता
परिवार और संस्कार भी जरुरी
हमारे हिंदू समाज में पहले तो लडक़ा-लडक़ी बिना देखे परिवार की सहमति से ब्याह दिए जाते थे और पूरा जीवन एक-दूसरे के प्रति समर्पित होकर पारिवारिक दायित्व निभाए जाते थे और सभी का बराबर आदर-सत्कार भी किया जाता था लेकिन बदलते परिवेश में बच्चों को आधुनिकीकरण की दौड़ में कहीं न कहीं ऐसे संस्कार नहीं दिए जा रहे है। जिससे भटक कर युवा पीढ़ी ऐसे महापाप की तरफ बढ़ रही है। इस पर रोक लगाने के लिए परिवार को एकजुट होना होगा और एक-दूसरे का सम्मान-आदर करना होगा।
सरोज ठाकुर, विवाहिता
बता दें कि इन सभी घटनाओं के बीच मंगलवार को शहरभर में महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु के लिए वटसावित्री पूर्णिमा का व्रत रखा। दिनभर भूखी-प्यासी रहकर दोपहर को वटवृक्ष का पूजन कर महिलाओं ने एक-दूसरे को सुहाग की वस्तुएंं और फल भेंट कर आर्शीवाद लिए। शहर की इन महिलाओं ने पूजन के बाद इंदौर की सोनम जैसी महिलाओं को जमकर कोसा और उन्हें सुहागिनों पर कलंक बताया। उन्होंने बताया कि पति को हिंदू संस्कारों में परमेश्वर का दर्जा दिया गया है और उसी पति से धोखा कर उनकी हत्या करना महापाप है। ऐसी महिलाओं ने पतिव्रता नारियों की छवि को धूमिल किया है।
क्यों मनाया जाता है वट सावित्री का व्रत
इस व्रत की कथा और जानकारी के अनुसार जब सावित्री के पति के यमराज प्राण हर कर ले गए तो अपने पति को फिर से जीवित करने के लिए और उनके प्राण वापस लाने के लिए सावित्री स्वयं यमराज के पीछे गई और पति के प्राण वापस लाई। इसके बाद वटवृक्ष के नीचे साधना कर पूजा-अर्चना की थी। तभी से वटसावित्री की पूजा करने की परंपरा चल रही है। इस दिन महिलाएं सामुहिक रुप से वटसावित्री पूर्णिमा की कथा सुनती है और इसके बाद नजदिकी वटवृक्ष की पूजा कर एक दूसरे को सुहाग की वस्तुएं और फल भेंट करती है।
सोशल मीडिया की बलि चढ़ रहे संस्कार
व्रत का पूजन करने के बाद विवाहिता ने कहा कि सोनम जैसी महिलाओं को हिंदू समाज कभी माफ नहीं करेगा। दरअसल, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण सोशल मीडिया है। इंस्टाग्राम, फेसबुक और वाट्सअप पर दूर-दराज के अनजान लोगों से परिचय, बातचीत और फोटो वीडियों आदान-प्रदान का सिलसिला आसानी से शुरु हो जाता है। इसके बाद घर में अकेलेपन का फायदा उठाकर महिलाओं को गुंडे और असामाजिक टाईप के लोगों द्वारा बहकाया जाता है और उनका इतना ब्रेनवॉश कर दिया जाता है कि वे अपने भगवान माने जाने वाले पति की ही हत्यारन बन जाती है। सोशल मीडिया पर रोक लगाई जानी चाहिए।
अर्चना पवार, विवाहिता
परिवार और संस्कार भी जरुरी
हमारे हिंदू समाज में पहले तो लडक़ा-लडक़ी बिना देखे परिवार की सहमति से ब्याह दिए जाते थे और पूरा जीवन एक-दूसरे के प्रति समर्पित होकर पारिवारिक दायित्व निभाए जाते थे और सभी का बराबर आदर-सत्कार भी किया जाता था लेकिन बदलते परिवेश में बच्चों को आधुनिकीकरण की दौड़ में कहीं न कहीं ऐसे संस्कार नहीं दिए जा रहे है। जिससे भटक कर युवा पीढ़ी ऐसे महापाप की तरफ बढ़ रही है। इस पर रोक लगाने के लिए परिवार को एकजुट होना होगा और एक-दूसरे का सम्मान-आदर करना होगा।
सरोज ठाकुर, विवाहिता
Author: Kpn 24
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