"हर खबर, आपकी नज़र"

kpn 24

अपराधियों में हो कानून का भय और जनता में हो सुरक्षा का अहसास — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

KPN24:- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश में पुलिस की छवि ऐसी होनी चाहिए जिससे अपराधियों में कानून का भय और आम नागरिकों में सुरक्षा का अहसास उत्पन्न हो। मुख्यमंत्री आज मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।

बैठक में राज्य की कानून-व्यवस्था, मादक पदार्थ नियंत्रण, सड़क सुरक्षा, साइबर अपराधों की रोकथाम तथा प्रशासनिक समन्वय जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर गृह मंत्री विजय शर्मा, मुख्य सचिव विकास शील, अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक दोनों की भूमिका कानून-व्यवस्था बनाए रखने में समान रूप से महत्वपूर्ण है। जिन जिलों में दोनों के बीच समन्वय मजबूत है, वहां बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को प्रशासनिक उदासीनता माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सड़कों पर अव्यवस्था फैलाने, चाकूबाजी, हत्या, गौ-तस्करी और धर्मांतरण जैसे गंभीर अपराधों पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए। उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण में उल्लेखनीय सुधार करने वाले जिलों के अनुभवों को अन्य जिलों में मॉडल के रूप में लागू किया जाए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने नशाखोरी और मादक पदार्थों की अवैध तस्करी पर सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि “नशा अपराधों की जड़ है, और इसे समाप्त करना ही कानून-व्यवस्था सुधार की पहली शर्त है।” मुख्यमंत्री ने एनकॉर्ड (NCORD) के तहत राज्यव्यापी अभियान चलाने, सीमावर्ती जिलों में तस्करी पर रोक लगाने और एनडीपीएस एक्ट के तहत समय-सीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराने हेतु जनजागरूकता अभियान चलाने को कहा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में घुसपैठियों की पहचान और नियंत्रण हेतु विशेष टास्क फोर्स (STF) गठित की गई है। सीमावर्ती जिलों में सघन जांच और संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि अपराधों की अनदेखी भविष्य में गंभीर अपराधों को जन्म देती है, इसलिए हर मामले में समयबद्ध कार्रवाई अनिवार्य है।

बैठक में आत्मसमर्पित माओवादियों के पुनर्वास और आजीविका सशक्तिकरण पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पित माओवादियों को कौशल विकास प्रशिक्षण देकर स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जाए, ताकि वे मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें।

सड़क सुरक्षा पर गहन चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि हेलमेट, सीट बेल्ट और यातायात नियमों का पालन न करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर सुधारात्मक कार्य किए जाएं, डीजे या लाउडस्पीकर का रात 10 बजे के बाद उपयोग प्रतिबंधित किया जाए, और नशे में वाहन चलाने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई हो। साथ ही सड़कों पर आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु भी प्रभावी कदम उठाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने साइबर अपराधों को आधुनिक युग का सबसे जटिल खतरा बताते हुए कहा कि पुलिस बल को निरंतर तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाए। साइबर हेल्पलाइन नंबर का प्रचार-प्रसार जनसंपर्क विभाग के सहयोग से किया जाए और प्रत्येक जिले में साइबर जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि नागरिक ऑनलाइन ठगी और फिशिंग जैसे अपराधों से सुरक्षित रह सकें।

अंत में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि —

> “पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन, टीम भावना और साझा उत्तरदायित्व ही विकसित छत्तीसगढ़ की सच्ची नींव है।”

उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन तभी सशक्त बन सकते हैं, जब प्रत्येक अधिकारी अपने दायित्व को ईमानदारी से निभाए और टीम के रूप में मिलकर परिणाम दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं की सफलता नीतियों से नहीं, बल्कि उन्हें लागू करने वाली टीम की पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही से तय होती है। यही प्रशासनिक और भावनात्मक समन्वय “विकसित छत्तीसगढ़” की दिशा में राज्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।

Kpn 24
Author: Kpn 24

Leave a Comment

Read More