
ब्रांडेड ज्वेलरी के आकर्षक दावों पर उठे सवाल, केंद्र सरकार से समान नियम और निष्पक्ष जांच की मांग
KPN24.com जांजगीर-चांपा 20 अगस्त2026
सोना सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों की परंपरा, भरोसे और वर्षों की मेहनत से जुड़ा है। ऐसे में जब ज्वेलरी बाजार में ‘सस्ता सोना’, ‘जीरो मेकिंग चार्ज’ और आकर्षक एक्सचेंज ऑफर जैसे दावे तेजी से ग्राहकों को लुभा रहे हैं, तब पारंपरिक सराफा कारोबारियों ने इन दावों की पारदर्शिता को लेकर आवाज बुलंद की है।
छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन से जुड़े कारोबारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय को ज्ञापन भेजकर पूरे देश में ज्वेलरी कारोबार के लिए समान, पारदर्शी और प्रभावी नियम लागू करने की मांग की है। कारोबारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी ब्रांड का विरोध करना नहीं, बल्कि उपभोक्ता हितों के साथ-साथ वर्षों से ईमानदारी और भरोसे के आधार पर कारोबार कर रहे स्थानीय सराफा व्यापारियों एवं स्वर्ण कारीगरों के हितों की रक्षा करना है।
‘सस्ता सोना’ के दावों की हो निष्पक्ष जांच
सराफा कारोबारियों का कहना है कि बड़े ब्रांडेड शोरूमों द्वारा आकर्षक विज्ञापनों के माध्यम से ग्राहकों को कई तरह के ऑफर दिए जाते हैं। ऐसे में प्रत्येक दावे की वास्तविकता और उसकी शर्तें उपभोक्ता के सामने स्पष्ट होना जरूरी है।
व्यापारियों ने मांग की है कि ‘सस्ता सोना’, ‘जीरो मेकिंग चार्ज’ और अन्य आकर्षक योजनाओं से जुड़े दावों की सक्षम एजेंसियों द्वारा जांच हो तथा उपभोक्ताओं को वजन, शुद्धता, एचयूआईडी, मेकिंग चार्ज, जीएसटी और अंतिम कीमत की स्पष्ट जानकारी दी जाए।
बिलासपुर के कथित जांच प्रकरण ने बढ़ाई चिंता
ज्ञापन में बिलासपुर के एक बड़े ब्रांडेड ज्वेलरी शोरूम से जुड़े कथित मामले का भी उल्लेख किया गया है। एसोसिएशन के अनुसार, एक 22 कैरेट एचयूआईडी युक्त आभूषण को जांच के दौरान 20 कैरेट बताया गया, जबकि पुनः जांच में वही आभूषण 916 यानी 22 कैरेट पाया गया।
सराफा कारोबारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में किसी प्रतिष्ठान को दोषी ठहराने के बजाय निष्पक्ष जांच, परीक्षण मशीनों की विश्वसनीयता और रिपोर्टिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
12 सूत्रीय मांगों के साथ केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील
सराफा एसोसिएशन ने स्वर्ण कारोबार को लेकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें स्वतंत्र स्वर्ण जांच की सुविधा, एचयूआईडी और हॉलमार्क की सख्त निगरानी, परीक्षण मशीनों की नियमित कैलिब्रेशन, भ्रामक विज्ञापनों पर रोक, पूरे देश में सोने की दरों में पारदर्शिता और सभी ज्वेलरी प्रतिष्ठानों के लिए समान बिलिंग व्यवस्था प्रमुख हैं।
इसके साथ ही पारंपरिक स्वर्ण कारीगरों के लिए स्वर्णकार कल्याण बोर्ड अथवा भारतीय स्वर्ण कला बोर्ड गठित करने, स्वर्ण ऋण व्यवस्था में स्वर्ण के स्रोत एवं स्वामित्व का उचित सत्यापन कराने और अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की मांग भी की गई है।
जांजगीर-चांपा में भी सराफा कारोबारियों ने दिखाई एकजुटता
इस मांग को लेकर छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के जिला प्रमुख जांजगीर-चांपा एवं बलौदा सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश सोनी ने स्थानीय सराफा कारोबारियों की आवाज को मजबूती से सामने रखा।
उनके साथ बलौदा सराफा एसोसिएशन के सचिव सुरेंद्र सोनी, जांजगीर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय सोनी सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सराफा व्यापारी और स्वर्ण कारोबारी भी इस मुद्दे पर एकजुट नजर आए।
इस क्रम में लखन सोनी, शशांक शेखर, खोमिलाल सोनी (शिवरीनारायण), संजय सोनी (खरौद), नवीन सोनी (पामगढ़), व्यास सोनी, रघुनंदन सोनी, नारायण सोनी, ओंकार सोनी, सुरेश सोनी, महेश स्वर्णकार, विनोद सोनी और संदीप सोनी सहित अनेक सराफा कारोबारियों ने इस पहल के समर्थन में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
स्थानीय सराफा बाजार के पीछे है हजारों कारीगरों का रोजगार
सराफा कारोबारियों का कहना है कि स्थानीय ज्वेलरी व्यवसाय से केवल दुकानदार ही नहीं, बल्कि स्वर्ण कारीगर, छोटे निर्माता, डिजाइनर, पॉलिश करने वाले और अनेक परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। इसलिए स्थानीय सराफा बाजार को मजबूत करना सीधे तौर पर स्थानीय रोजगार और पारंपरिक भारतीय स्वर्ण कला को मजबूत करना है।
‘ब्रांड से नहीं, भ्रामक व्यवस्था से है सवाल’
सराफा कारोबारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रतिस्पर्धा हो, लेकिन नियम सबके लिए समान हों। ग्राहक को बेहतर कीमत मिले, लेकिन उसके साथ शुद्धता, वजन और बिलिंग की पूरी जानकारी भी पारदर्शी तरीके से सामने रखी जाए।
उनका कहना है कि ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तभी सार्थक होगा, जब पीढ़ियों से भारतीय स्वर्ण कला को जिंदा रखने वाले स्थानीय सराफा व्यापारी और स्वर्ण कारीगर भी सुरक्षित और मजबूत रहें।










