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दादा की पेंशन और सूरज भैया के मार्गदर्शन ने प्रत्यूष को MBBS तक पहुंचाया

23 लाख अभ्यर्थियों के बीच प्रत्यूष ने हासिल की शानदार सफलता, छत्तीसगढ़ में 35वीं रैंक; रायपुर मेडिकल कॉलेज में मिला प्रवेश

Kpn24.com सक्ती 01 सितंबर 2026

मेहनत, परिवार का सहयोग और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो छोटे से गांव से निकलकर भी बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। सक्ती जिले के मालखरौदा विकासखंड के ग्राम पिहरीद निवासी शिक्षक सुभाष चंद्रा और अन्नपूर्णा चंद्रा के पुत्र प्रत्यूष चंद्रा ने नीट परीक्षा 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अपनी जगह बनाई है।

प्रत्यूष की सफलता की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि उनकी पढ़ाई का खर्च उनके दादा बलीराम चंद्रा की पेंशन से पूरा हुआ, जबकि उनके भैया सूरज चंद्रा के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने उन्हें नीट की तैयारी के लिए आगे बढ़ाया।
23 लाख अभ्यर्थियों के बीच बनाई खास पहचान
नीट 2026 की परीक्षा में लगभग 23 लाख परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रत्यूष चंद्रा ने 720 में से 594 अंक हासिल करते हुए अखिल भारतीय स्तर पर 12,044वीं रैंक प्राप्त की। वहीं छत्तीसगढ़ में उन्होंने 35वीं रैंक हासिल की, जबकि छत्तीसगढ़ की अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में 16वां स्थान प्राप्त किया।
प्रत्यूष की इस उपलब्धि ने उनके परिवार के साथ-साथ उनके गांव और क्षेत्र का नाम भी रोशन किया है।
पश्चिम बंगाल से लेकर रायपुर तक MBBS का सफर
राष्ट्रीय स्तर की काउंसलिंग में प्रत्यूष को पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले में एमबीबीएस सीट मिली। इसके बाद उन्हें अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ में सामान्य सीट के माध्यम से पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर में एमबीबीएस में प्रवेश मिला।
पढ़ाई में शुरू से रहे मेधावी
प्रत्यूष शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं। उन्होंने कक्षा 10वीं में 98 प्रतिशत और कक्षा 12वीं में 96 प्रतिशत अंक हासिल किए। उनकी प्रारंभिक शिक्षा ग्राम पिहरीद स्थित सरस्वती शिशु मंदिर से हुई। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई ओडिशा और राजस्थान में पूरी की।
दादा की पेंशन बनी पढ़ाई का सहारा
प्रत्यूष की सफलता के पीछे उनके परिवार के त्याग की भी अहम भूमिका रही। उनके दादा बलीराम चंद्रा, जो सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, अपनी पेंशन से प्रत्यूष की पढ़ाई का खर्च उठाते रहे। परिवार के इस सहयोग ने प्रत्यूष को आर्थिक चिंताओं से दूर रखते हुए अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर दिया।
वहीं उनके भैया सूरज चंद्रा ने नीट का फार्म भरवाने से लेकर परीक्षा की तैयारी के लिए प्रेरित करने तक लगातार उनका मार्गदर्शन किया। सूरज के प्रोत्साहन और मार्गदर्शन का परिणाम है कि प्रत्यूष आज चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अपने सपने की ओर कदम बढ़ा चुके हैं।
गांव से मेडिकल कॉलेज तक पहुंची सफलता की कहानी
पिहरीद जैसे गांव से निकलकर रायपुर के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज तक पहुंचना प्रत्यूष की मेहनत और परिवार के सहयोग की मिसाल है। उनकी सफलता ने यह संदेश भी दिया है कि संसाधनों की सीमाएं प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं।
प्रत्यूष के एमबीबीएस में चयन पर उनके परिजनों, शिक्षकों और शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। रामकुमार चंद्रा, सानीराम चंद्रा, प्रफुल्ल चंद्रा, सूरज चंद्रा, आयुष चंद्रा, अभिषेक चंद्रा, नंदकुमार चंद्रा, कबीर गवेल, रोहित चंद्रा, रवि चंद्रा और चंद्रभूषण चंद्रा सहित परिवारजनों एवं शुभचिंतकों ने प्रत्यूष को बधाई दी है।

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Author: Kpn 24

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